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पिछले 3 वर्षों में घटा खिलौनों का आयात: प्रधानमंत्री मोदी ने खिलौना जगत में आत्मनिर्भर बनने का किया था आह्वान।

Toy import fell in last 3 years in India

Toy import fell in last 3 years in India: विगत 3 वर्षों में भारत में आयात (Import) होने वाले खिलौनों (toys) में काफी कमी देखने को मिली है। इस बात की जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने सदन में लिखित रूप से दी है।

राज्य मंत्री सोम प्रकाश जी ने अपने लिखित जवाब में बताया कि छोटे व बड़े आकार के खिलौने व इसी तरह के अन्य मनोरंजक खिलौनों के मॉडल का आयात वित्त वर्ष 2021 में 53.58% घटकर 129.63 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं वीडियो गेम कंसोल व मशीनें, फनफेयर, टेबल या पार्लर गेम्स का आयत वित्त वर्ष 2021 में 21.21% घटकर 38.12 मिलियन डॉलर हो गया।

इसके अलावा त्योहार, कार्निवाल व इसी तरह के अन्य मनोरंजन के दौरान इस्तेमाल किये जाने वाले खिलौनों के आयात में भी भारी कमी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2021 में ऐसे खिलौनों के आयात में 37.61% की कमी के साथ सिर्फ 10.17 मिलियन डॉलर का ही आयात हुआ है।

पिछले 3 वर्षों में क्यों घटा खिलौनों का आयात? (Why did toy import fall in the last 3 years in India?)

सरकार का सहयोग।

घरेलू खिलौना उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने काफी महत्वपूर्ण कदम उठाए है, जिस कारण खिलौना आयत में तो काफी गिरावट देखने को मिली है, लेकिन घरेलु उद्योगों को काफी फायदा भी पंहुचा है। केंद्र सरकार ने खिलौनों पर मूल सीमा शुल्क (Basic Custom Duty) को 20% से बढ़ाकर 60% तक कर दिया है, जिससे विदेशों से आने वाले खिलौने महंगे हो गए है।

इसके अलावा आयत होने वाले सभी खिलौनों की सैंपल टेस्टिंग (Sample Testing) की जाती है जिससे उसकी गुणवत्ता को मापा जा सके। चीन से आने वाले अधिकतर खिलौने इसीलिए सस्ते हुआ करते थे क्योंकि उनमे निम्न वर्ग की प्लास्टिक व अन्य खराब कच्चे माल का प्रयोग किया जाता था। लेकिन अब Toys (Quality Control) Order लग जाने के कारण ऐसे माल का आयात होना काम हो गया है। इससे घरेलु उद्योगों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का सुनहरा मौका मिल गया।

मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय खिलौना उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान

अगस्त 2021 में Mann Ki Baat कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने खिलौना जगत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम के दौरान मोदी जी ने कहा था कि वैश्विक खिलौना उद्योग 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है लेकिन इसमें भारतीय उद्योग जगत की हिस्सेदारी बहुत कम है।

प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से अपील की थी कि वों भारतीय परंपरा और संस्कृति के अनुरूप, छेत्रिय व कुशल कारीगरों के साथ मिलकर खिलौनों का आविष्कार करें। इससे भारतीय सभ्यता का प्रचार-प्रसार भी होगा और भारतीय खिलौना उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने भारतीय उद्योगों को बदलते समय के अनुसार डिजिटल गेमिंग जगत में अपना वर्चस्व बढ़ाने को भी कहा था।

भारत सरकार द्वारा बनाये गए खिलौना समूह (Toy Clusters In India)

आपको यह भी बता दे कि विकास आयुक्त कार्यालय (Handicraft) व कपड़ा मंत्रालय ने हस्तशिल्प अर्थात हाथों से खिलौना बनाने वाले शिल्पकारों के लिए कुल 13 Cluster निर्धारित किये गए है। इसके तहत इन कारीगरों को सरकार आर्थिक मदद के साथ-साथ खिलौनों की प्रदर्शनी, बिक्री व निर्यात के लिए भी मदद करती है।

इसके आलावा पारंपरिक खिलौना उद्योग की मदद करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry) ने पुरे देश में 14 Cluster निर्धारित किये है। इन जगहों पर सरकार खिलौना उद्योग को कच्चे माल, मशीन, डिज़ाइन व अन्य मदद प्रदान करती है। सरकार की इस योजना के तहत 8839 कारीगरों को लगभग 41.60 करोड़ का फायदा हो चूका है।

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Satyam Tiwari
Satyam Tiwari is the Founder and Editor-in-Chief of Parakram News. He is as unbiased as any other popular journalist out there. Satyam has started this media portal to bring a necessary change in the perception of people living in this beautiful country, 'India'.
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